दरभंगा की बंद पड़ी फैक्ट्रियों पर सवाल, 20 साल से क्यों नहीं जागी सरकार?
आए दिन राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव जाले कमतौल में आ रहे हैं
राष्ट्रीय जनता दल जिला अध्यक्ष दरभंगा उदय शंकर यादव ने
आने से पहले ही जिला अध्यक्ष ने सीधा निशाना नीतीश कुमार और विपक्ष पार्टी के और दरभंगा के चीनी मिल फैक्ट्री पर भंडाफोड़ करते हुए न्यूज़ इंडिया 11 से कहा
दरभंगा की बंद पड़ी फैक्ट्रियों पर सवाल, 20 साल से क्यों नहीं जागी सरकार?
दरभंगा के युवाओं के बीच आज गहरा आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों पिछले 20 सालों से दरभंगा की आठ बड़ी फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं? जहां एक ओर NDA की सरकार लगातार सत्ता में है, वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार लंबे समय से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं। फिर भी युवाओं को रोजगार देने का वादा क्यों अधूरा है?
दरभंगा के युवाओं का आरोप है कि सरकार सिर्फ जात-पात की राजनीति में उलझाकर उन्हें बेरोजगारी के दलदल में धकेल रही है। अगर आज ये फैक्ट्रियां चालू होतीं, तो हजारों लोगों को रोजगार मिलता। सवाल यह है कि जब सरकार इन्हीं वादों के साथ सत्ता में आई थी, तो फिर इन फैक्ट्रियों को चालू करने के वादे क्यों भुला दिए गए?
बंद पड़ी फैक्ट्रियों की लिस्ट:
अशोक पेपर मिल
मठा रही चीनी मिल
रैयाम चीनी मिल
लोहट चीनी मिल
सकरी चीनी मिल
हसनपुर चीनी मिल
जूट मिल, समस्तीपुर
इन फैक्ट्रियों के बंद होने से न सिर्फ रोजगार का संकट गहराया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी चौपट हो चुकी है। अगर ये फैक्ट्रियां चालू होतीं, तो कम से कम 1 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता, 2 लाख मजदूरों को काम मिलता और 2 लाख लोग व्यापार व बिजनेस से जुड़ते। यानी सिर्फ दरभंगा में 5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता।
कभी रोजगार का हब था दरभंगा, आज पलायन की मार झेल रहा है
कभी दरभंगा वह जगह थी, जहां दूसरे जिलों और राज्यों से लोग काम की तलाश में आते थे। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि दरभंगा के लोग ही रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। क्या यही विकास का मॉडल है, जिसका वादा सरकार ने किया था?
अब युवाओं ने ठाना, बदलाव लाना है
युवाओं का साफ कहना है कि इस बार जात-पात से ऊपर उठकर बदलाव लाना है। औद्योगिक क्रांति के लिए युवाओं ने अब तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि नई सोच और नई नीति के साथ ही बिहार में उद्योगों की वापसी संभव है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार युवाओं के इस गुस्से को समझेगी? क्या बंद पड़ी फैक्ट्रियों को फिर से चालू करने की पहल होगी? या फिर सत्ता की कुर्सी बचाने के लिए फिर से सिर्फ वादों का खेल खेला जाएगा? दरभंगा के युवा अब इस सवाल का जवाब मांग रहे हैं – अब और नहीं, बदलाव जरूरी है!










